Saree Wali Shayari In Hindi

बेस्ट शायरी ऑफ़ साड़ी इन हिंदी साड़ी वाली शायरी इन हिंदी दोस्तों वन्स अगेन साड़ी वाली शायरी  लेकर हाजिर हु पढ़िए और अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये साड़ी वाली शायरी हिंदी में,
साड़ी वाली शायरी हिंदी में बेस्ट फीमेल अट्रेक्ट साड़ी शायरी हिंदी में 


saree shayari in hindi
बेस्ट साड़ी शायरी 





वो पिली साड़ी वाली वाली शायरी 

पहन कर निकली थी वो पिली साड़ी

के दिल मेरा आवारा सा हो गया..
देख के उसे उस साड़ी में
एक प्यार दुबारा सा हो गया...!!




गलियों में कोहराम शायरी

जिस दिन आएगी वो साड़ी पहनकर महफ़िल में

सुनी पड़ी दिल की गलियों में कोहराम मचेगा..
उधर कुछ लोग जलाएंगे दिये उनके इस्तकबाल में
इधर महफ़िल में कुछ दीवानो का दिल जलेगा...!!



हुक बंद कर दो साड़ी के शायरी

हाथ पहुंचते नहीं पीछे तक तुम जरा मदद कर देना..

आहिस्ता से अपने हाथों से तुम मेरे हुक को बंद कर देना...!!



आखों से कत्लेआम साड़ी वाली के शायरी

यु तो वो बुर्के और बिकनी में भी खूबसूरत लगते है

पर यक़ीनन जब वो साड़ी या सूट पहनते है..
महफ़िल में सरेआम आखों से कत्लेआम करते है...!!



माथे पर बिंदी साड़ी वाली के शायरी

हाथों पर हल्की सी लाली तुम लगाती हो

खुली जुल्फे माथे पर बिंदी सजाती हो..
वैसे तो हर कपडे खूबसूरत दिखती हो पर
लाल साड़ी में तो कुंवारों पर कहर मचाती हो...!!




साड़ी वाली महसूर हो गए शायरी


उतरी जो कमर से एक सिलवट बनकर
फिर साड़ी वो बनारस की मशहूर हो गई...!!




साड़ी वाली उफ्फ्फ शायरी

ये सितम ढाती साड़ी तुम्हारी

उसमें लिपटी खूबसूरती तुम्हारी..
नज़रें खींचे तेरी ये बनारसी साड़ी
उपर से ये लाल लिपिस्टिक तुम्हारी उफ्फ्फ



खूबसूरत बदन पर साड़ी वाली शायरी

रूप तुम्हारा निखर कर सामने आया है..

जब खुबसुरत बदन पर साड़ी को पहना...!!



वो आसमानी साड़ी तेरी मुझे अच्छी लगी शायरी

यु तो कभी गौर से देखा नहीं बस

अंदाज़ और बातें तेरी मुझे अच्छी लगी..
पहनने को तो चाहे आसमान ओड लो
पर वो आसमानी साड़ी तेरी मुझे अच्छी लगी...!!



कसम से मुझपर कहर ढाह रही हो शायरी

ये जो तुम लाल साड़ी में लहरा रही हो

कसम से मुझपर कहर ढाह रही हो..
हमारे पास ही आ के क्यू शर्मा रही हो
लगता है तुम भी दिल में कुछ छुपा रही हो...!!



साड़ी की पिन्निया शायरी

सांसे सुबह से रुक रुक कर आ रही है मेरी..

तुम्हारी साड़ी के पिन्नियों में अटक है शायद...!!


साड़ी सी लिपटी शायरी

तू किसी साड़ी सी लिपटी है

में किसी चाँद सा इठलाता हूँ..
तू किसी घाट में उतरती है
में उसमें डूबता चला जाता हूँ...!!

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