Shayri Sad best Hindi july 2019

मेहबूब के रुशवा होने पर  दिल से निकली कुछ खाश शायरी दोस्तों अपनी मेहबूबा के लिए कुछ दिल के अल्फ़ाज़ लाया हु चुन चुन कर पढ़िए और अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये और मेरे ब्लॉग को फॉलो कीजिये प्लीज धन्यवाद।। 











कौन रखेगा मेरे होठों पे उंगली अपनी..

कौन बोलेगा ऐसी बात नहीं करते हैं...!!!



लग गई बद्दुआ हमें उन गुलाबों की
ए साहिबा️..
जिनको हमने तुम्हारी खातिर तोड़ा था...!!!



जिनसे बे-तहाशा मोहब्बत हो उनसे..
नाराज़गी का ताल्लुक भी बहुत गहरा होता है...!!!




तेरी शर्तो के मुताबिक मै ढलू तो कैसे..
शॉम ढलते ही तेरी शर्ते बदल जाती है...!!!




सज़ा बन जाती है गुज़रे हुये वक़्त की निशानियाँ..
ना जानें क्यूँ मतलब के लिये मेहरबान होते हैं लोग...!!!



पल पल तरस्ते थे एक पल क लिए..
पर वो पल भी आया एक पल क लिए...!!!



सोचा खुदा से मांग लू तुझे..
पर वो पल भी ना रुका एक पल के लिए...!!!



किरदार मेरा हर दिल में घर बनाके रहता है
मेरे किस्से किसी किताब में मिलेंगे नहीं तुम्हें...!!!



याद है मुझे वो चार पल की महोब्बत..
किसी ने हम पर भी एहसान किया था...!!!



कायदे अलग थे हम दोनों के आगे बढ़ने के..
उसने भाव बढ़ाये हमने मोहब्बत...!!!




तेरे गले का मंगलसूत्र बनना चाहता था..
तेरे पैरों की धूल बनकर रह गया...!!!



अब तो मुझे वोट दे दो..
मैं इश्क के खिलाफ खड़ा हू...!!!


तोड़ कर फेंक दी होगी उसने तोहफे मे दी वो चूड़ियाँ..
डर था उसे खनकेगी हाथ मे तो हम याद आयेंगे...!!!



मैं तो बस एक मामूली सा सवाल हूँ साहिब..
और लोग कहते हैं तेरा कोई जवाब नहीं...!!!



मन के धागे मे इक गाँठ लगाई मैंने..
तेरे बाद किसी को नहीं पिरोया मैंने...!!!



अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा..
जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है...!!!



झुक् गया इश्क़ का पलड़ा चंद सिक्को के वजन से..
नाजाने तराजू ख़राब था या फिर तोलने वाला...!!!



मैं तब भी बांध दूंगा तुम्हारे पैरों में पायल..
हाँ उस उम्र में भी जब मेरे घुटनो में दर्द होगा...!!!




हर किसी ने पूछा मेरा हाल मुझसे..
सिवाए उसके जिसे बताना था मुझे...!!!



पढ़ रहा था मोहब्बत की किताबो को..
पहले पन्ने में इश्क़ दिखा बाकी में बेवफाई...!!!



महक रही है जिंदगी आज भी जिसकी खुशबू से..
वो कौन थी जो यूँ गुजर गयी मेरी यादों से...!!!



तलाशी ले ले ए दोस्त तू भी मेरी..
अगर जेबों में मज़बूरी के सिवा कुछ मिले तो ये जिंदगी तेरी...!!!



जिस्म छूने से मोहब्बत नही होती इश्क.. 
वो जज्बा है जिसे ईमान कहते हैं...!!!



किसी को क्या बताए की कितने मजबुर है हम..
बस तुम्ही को चाहते है और ''तुमसे ही दुर है हम...!!!



अक्सर दिखावे का प्यार ही शोर करता है..
सच्ची मोहब्बत तो आँखों के इशारों में ही सिमट जाती है...!!!



मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है एक तरफा..
महोब्बत की छोटी सी दुकान है नफ़रत के बाजार में...!!!




अपने नाखून बढ़ा के रखो..
मेरे जख्म कुरेदने मे काम आएंगे...!!!




सुनो कल तुम्हें घर परिवार समाज की इज्ज़त दिखेगी
इसलिए कह रहे हैं इश्क तुम्हारे बस का नहीं...!!!




तेरी खाई हुवी झुठी क़समें मेरे सर की..
अब मुझे अक्सर बिमार रखती है...!!!



ना देंगे कभी तेरी चाहत को नाम ए मोहब्बत..
सुना हे मोहब्बत कभी मुकम्मल नहीं होती...!!!



अक्सर पूछते है लोग किसके लिए लिखते हो..
अक्सर कहता है दिल की काश कोई होता...!!!




फिर तुम्हें फोन करने की इजाज़त है..
याद आऊं अगर उदासी में...!!!




कभी आरजू थी कि हर कोई जाने मुझे..
लेकिन आज तलब है कि गुमनाम हो जाऊं मैं...!!!




मैने यादो को उठाकर देखा..
एक दिन तुम मेरी थी...!!!




बिछड़ी थी जिस गरूर से वो भी तो याद कर️..
आँखो में तेरी आज ये आँसू फिजूल है...!!!




जो तुम्हारी ख़ैरियत बनाये रखे..
मुझे वो ताबीज़ होना है...!!!



बहुत बार सर झुकाया हर एक दर पर..
और तुझें पाने की तमन्ना तमाशा बन गयी...!!!



काँच कि चूड़ी लेके जब तक मे लौटा..
उसके हाँथ मे एक सोने का कंगन था...!!!




कुछ यूँ भीग जाना होली के दिन..
कि तुम्हें देखने वालों के हलक सूख जाए(गड्ढे वाली डिंपल)...!!!



कोई रंग उसे लगा रहा था..
चेहरा मेरा लाल हो रहा था...!!!



 ये उनकी मोहब्बत का नया दौर है..
जहाँ कल मैं था आज कोई और है...!!!



मेरी अधूरी ख़्वाहिश बन कर रह जाना तुम..
दोबारा जीने का इरादा नहीं रखते हम...!!!



गुलाबों सी महकती थी जिन्दगी तेरे संग..
अब तो यादें भी काटों सी चुभन देती हैं...!!!



आप अच्छे लगे इसलिए कुबूल कर लिया..
सहाब  
वरना लफड़ा मोह्हबत का तौबा तौबा...!!!



तेरी तस्वीर से ज्यादा जहाँ में कुछ भी खूबसूरत नहीं..
मुझे तुझसे प्यार करने के लिए तेरी ही ज़रूरत नहीं...!!!


गिरते हुऐ अश्कों की कीमत ना पूछना..
इश्क के हर बूंद में लाखों सवाल होते...!!!



काश कोई ऎसी भी सुबह आये मेरी जिंदगी मे..
मेरी नींद खुले तेरी चुड़िओ की छन छन से...!!!



तेरे चेहरे को किसी रंग की जरूरत कहां..
तू तो बिन रंग के भी रंगीन सी लगती है...!!!



अक़्ल वालों के मुक़द्दर में ये जुनूँ कहाँ..
यह इश्क़ वाले हैं, जो हर चीज़ लुटा देते हैं...!!!



मेरे दर्द का एक भी हिस्सा लेकर तो देखो..
जिंदगी भर सायरी लिखते रहोगे जनाब...!!!



ऐ मौत तुझे भी गले लगा लूँगा जरा ठहर..
अभी है आरज़ू सनम से लिपट जाने की...!!!



ढाया खुदा ने ज़ुल्म हम दोनों पर..
तुम्हें हुस्न देकर और मुझे इश्क़ देकर...!!!



जमाने कि रुसवाई भी मंजूर थी उसे..
परहेज तो सिर्फ मेरी मौहब्बत से था...!!!



इससे पहले की हम खेलते उनके साथ होली..
वो मेरे दिल से खेल कर चली गयी...!!!



मुहब्बत जहाँ ज़रूरी थी साँसों की तरह..
हम उस दौर से पछता कर लौट चुके हैं...!!!



कैसे मान लू होली साल भर में एक ही बार आती हैं..
हमदोनों इश्क़ में हर रोज रंगीन हो जाते हैं...!!!



तुम्हारी बात लंबी है दलीलें हैं बहाने हैं..
हमारी बात इतनी है के हमारी आरज़ू तुम हो...!!!



सुलगती रेत पर पानी कीअब तलाश नहीं..
मगर ये कब कहा हमने कि हमें प्यास नहीं...!!!



सदा ही आबाद रहेगी यारो यह दुनियाँ..
हम ना होंगे तो कोई हम सा होगा...!!!


जिसके बिना फलक के मायने अधूरे हों..
मेरी जिन्दगी का वही हसीन सितारा तुम हो...!!!



बड़ी ही बे अदब है यह जुल्फें तुम्हारी..
हर वह हिस्सा चूमती है जो ख्वाहिश है हमारे...!!!



करवट भी कैसे बदलता..
वो हाथ पकड़ कर सोई थी...!!!



अनपढ़ सा बन्दा हूँ मोहतरमा..
तुम्हारे सिवा कुछ आता ही नही...!!!


कौन मेरी चाहतों का फसाना समझेगा इस दौर में..
यहाँ तो लोग अपनी जरुरत को मोहब्बत कहते हैं...!!!



रिहाई ले तो ली तुमने हमारे दिल के ऑगन से..
मगर तुम अपने जेहन से हमें कैसे निकालोगे...!!!



तुम्हारे इश्क़ ने सरकारी दफ्तर कर दिया मुझको..
ना कोई काम करती हूँ ना किसी की बात सुनती हूँ...!!!




जब किसी की कमियां भी अच्छी लगने लगे न..
तो मान लिजिय दिल दगा वाजी कर गया...!!!

आंख खुली तो जाग उठी हसरतें तमाम..
उसको भी खो दिया जिसे पाया था ख्वाब़ में...!!!