Shayri Hindi Diwangi wali


दीवानेपन पर मस्त मस्त शायरी  एक बार पढ़िए थो सही दोस्तों मजा न आये थो बोलना, एक प्रेमी के लिए अपनी प्रेमिका का के उपर लिखी मस्त मस्त सायरी बहुत मजेदार सायरी ह दोस्तों पढ़िए और शेयर कीजिये अपने दोस्तों के लिए 


love feeling image


महज़ तारीफ़ तो सरासर ज़ुल्म है..
चाँद जब बांहों में हो तो चूम लीजिये...!!!


गर्मियों के कुछ कपड़े खरीद रहा हूँ..
रंग तुम्हारे 'होंठों' का लूँ या 'गालों' का...!!!


ख़त जला देने से दास्ताँ कहाँ जलती है..
वो कहानियां अमर हो जाती हैं जो धड़कनों में पलती हैं...!!!


मैने हीरे की तरह उसको तराशा तो बहुत..
मगर वो जात की पत्थर थी... पत्थर ही रही...!!!


दो आंखों में,,,,दो ही आंसू..
एक तेरी वजह से,,,एक तेरी खातिर...!!!



एक शब्द हूँ कागज पर बिखरा हुआ..
तुम विरह की एक अंतहीन कविता हो...!!!


जिन्दगी के हर पन्ने में हजार ग़लती..
फ़िर भी किताब अच्छी हो , ख्वाहिश है...!!!


लफ़्ज़ों में नहीं, मुझे खामोशी में जवाब देना है तुमको..
वो बोले "कुछ नहीं इक लाल गुलाब देना है तुमको...!!!


बलखाने दे अपनी जुल्फों को हवाओं में..
जूड़े बांधकर तू मौसम को परेशां न कर...!!!


हमे क्या जरूरत खुशबू लगाने की..
तेरी मोहब्बत में महक कर गुलाब हुए है...!!!


वो रूठ्कर बोली तुम्हे सारी शिकायते हमसे ही क्यू हैं..
हमने भी सर झुकाकर बोल दिया की 
हमे सारी उम्मीदे भी तो तुमसे ही हैं...!!!


आईना नज़र लगाना चाहे भी तो कैसे लगाए..
काजल लगाती है वो आईने में देखकर...!!!


सँवरती है वो देखकर आईना..
सँवर जाए तो..आईना देखता है...!!!


वो - जो - मेरी समझ से परे है..
ये दिल भी कमबखत उसी पर मरे है...!!!


मेरे जिस्म से उसकी खुशबु आज भी आती है..
मैंने फुर्सत में कभी सीने से लगाया था उसे...!!!


कुछ न कहती है वो बस मुस्कुराती है वो..
पढ़ना पढता है आँखों को उसकी बड़ा शर्माती है वो...!!!


उसे ये शिकवा के हम उसे समझ न सके..
और हमें ये नाज़ के हम जानते बस उसको ही थे..!!



दुरुस्त कर ही लिया मैंने नजरिया अपना..
के दर्द न हो तो मोहब्बत मज़ाक लगती है...!!!


गर्मियों के कुछ कपड़े खरीद रहा हूँ..
रंग तुम्हारे 'होंठों' का लूँ या 'गालों' का...!!!


बलखाने दे अपनी जुल्फों को हवाओं में..
जूड़े बांधकर तू मौसम को परेशां न कर...!!!


हमे क्या जरूरत खुशबू लगाने की..
तेरी मोहब्बत में महक कर गुलाब हुए है...!!!


जो लकीर में नही थी..
ज़िन्दगी उसी से टकरा गयी...!!


मेरे जिस्म से उसकी खुशबु आज भी आती है..
मैंने फुर्सत में कभी सीने से लगाया था उसे...!!!


इश्क जिसकी तरफ निगाह कर गया..
झोपड़ी हो या महल तबाह कर गया...!!!


बड़ी बे अदब है जुल्फें तेरी..
हर वो हिस्सा चूमती है जो ख्वाहिश थी
 मेरी हाय" तेरी "जुल्फें...!!!


नीयत तो हमारी बस तुम्हें चाहने की है..
नियति को क्या मंजूर है ये तो रब ही जाने...!!!


अब निभाना मुजे भी नही आता..
माफ कर दो, यही कहता हूं...!!!


मोहब्बत' नही थी एक बार समझाया तो होता ..
बेचारा 'दिल' तुम्हारी 'खमोशी' को 'इश्क' समझ बैठा...!!!


दिल था मेरा कोई रफ कॉपी नहीं ..
जो तूँ आयी और घूचढ़-मूचड़ करके चली गयी
ज़ाहिल कहीं की...!!!


बहुत छाले है उसके पैरों पे 
कम्बख़त..
जरूर वसूलो पे चला होगा...!!!


हल्दी लगवाने की उम्र है मेरी
औऱ..
छोरियां चूना लगाकर जा रही हैं...!!!


सफ़र तुम्हारे साथ बहुत छोटा था मगर..
यादगार हो गये तुम अब जिदंगी भर के लिए...!!!


वो अपनी जीत पर ज़ेरे खुमार बैठा है..
उसे खबर करो वो मुझको हार बैठा है...!!!


दिल के टुकडे मजबूर करते हैं कलम चलाने को..
वरना,
कोई अपना दर्द लिखकर खुश नही होता...!!!



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